सप्लाई बाधित होने की आशंका से दामों में तेजी का दबाव
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.26 डॉलर यानी करीब 2% बढ़कर 115.04 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3.10 डॉलर यानी लगभग 3% की तेजी के साथ 105.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस महीने तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड में करीब 59% और WTI में लगभग 58% की बढ़ोतरी हुई है, जो मई 2020 के बाद सबसे बड़ा मासिक उछाल है।
क्या है इस तेजी का कारण?
इस तेजी की मुख्य वजह वैश्विक आपूर्ति पर बढ़ता खतरा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बाधित करने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है।
जंग के किसी भी नरमी के संकेत नहीं
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष में फिलहाल किसी भी तरह की नरमी के संकेत नहीं हैं। यही कारण है कि पिछले एक महीने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है। WTI ने जुलाई 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार किया और 106 डॉलर के आसपास पहुंच गया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर और हमले करने की चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों, तेल सुविधाओं, खार्ग आइलैंड और डीसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास कई विकल्प हैं। खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम तेल निर्यात केंद्र है, जहां से देश के करीब 90% तेल का निर्यात होता है। ऐसे में इस पर किसी भी संभावित हमले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लग सकता है। तनाव को और बढ़ाते हुए यमन के हूती विद्रोहियों ने सप्ताहांत में इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागे। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा क्षेत्र में जमीनी सैनिक तैनात करने की तैयारियों की खबरों ने बाजार में बेचैनी और बढ़ा दी है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
कोटक सिक्योरिटीज की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला के मुताबिक, एक महीने में 50% से ज्यादा की तेजी केवल सप्लाई टाइट होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह गहरे भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ना तय है।


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