ट्रंप का 'पलटूराम' अवतार: टैरिफ पर 12 बार यू-टर्न, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता
दुनिया जिसे सुपरपावर कहती है उस देश का राष्ट्रपति दुनिया का सबसे पावरफुल शख्स माना जाता है. वो देश है अमेरिका और राष्ट्रपति हैं डोनाल्ड ट्रंप. इनके टैरिफ से पूरी दुनिया डरी हुई है जिसे लागू करने की बात ये अमेरिकी चुनाव से भी पहले से कह रहे हैं. हालांकि अब तक ये लागू नहीं हुआ है और कितना टैरिफ लागू होगा ये भी दुनिया में कोई नहीं जान पा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप टैरिफ को लेकर कभी कुछ कह रहे हैं तो कभी कुछ और. कथनी अलग है और करनी अलग. टैरिफ की कहानी आधिकारिक रूप से फरवरी में शुरू हुई फिलहाल जून का महीना शुरू हुआ है. तब से अब तक कुल 4 महीने बीत चुके हैं इस दौरान ट्रंप ने कई बार टैरिफ को लेकर बदलाव किए हैं और उसे लागू अब तक नहीं कर पाए हैं.
टैरिफ का आइडिया
ट्रंप के लिए टैरिफ लगाना कोई नया आइडिया नहीं है. राष्ट्रपति बनने से पहले ही उन्होंने साफ कर दिया था कि वह उन देशों पर भारी शुल्क लगाएंगे, जिनसे अमेरिका व्यापार करता है. लेकिन जैसे ही उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और औपचारिक रूप से कार्यभार संभाला, उनकी नीतियों में अचानक बदलावों का सिलसिला शुरू हो गया, खासकर टैरिफ को लेकर.
हाल का अपडेट है कि ट्रंप प्रशासन ने स्टील पर लगने वाले शुल्क को 25% से बढ़ाकर सीधे 50% कर दिया है. इसी के साथ कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने 1 जून को दावा किया कि टैरिफ तो लगेगा ही. ये बयान तब आया जब एक अदालत ने ट्रंप प्रशासन की कई बड़ी टैरिफ नीतियों को बहाल कर दिया, जिन पर पहले रोक लगाई थी.
‘टैरिफ लगेगा, इतना लगेगा, उतना लगेगा’ का खेल
- यह पूरी कहानी 7 फरवरी से शुरू हुई जब ट्रंप ने पहली बार विदेशों से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाने की बात कही. इससे पहले ही वह चीन, कनाडा और मैक्सिको के लिए अलग-अलग टैरिफ की घोषणा कर चुके थे.
- 13 फरवरी को उन्होंने एक मेमो साइन किया, जिसमें अमेरिका को अपने हर व्यापारिक साझेदार के लिए एक रेसिप्रोकल टैरिफ यानी बराबरी का शुल्क तय करने का आदेश दिया गया.
- इसके बाद 26 मार्च को ट्रंप प्रशासन ने ऐलान किया कि 3 अप्रैल से अमेरिका में इंपोर्टेड कारों पर 25% शुल्क लगेगा, जिसमें ऑटो पार्ट्स भी शामिल होंगे, जिसकी डेडलाइन बाद में 3 मई तक बढ़ा दी गई.
- 27 मार्च को ट्रंप ने कहा कि इन टैरिफ को उनके पूरे कार्यकाल के दौरान स्थायी रखा जाएगा.
- फिर 29 अप्रैल को उन्होंने एक आदेश में कहा कि जो कंपनियां 25% शुल्क पहले से दे रही हैं, उन्हें अतिरिक्त टैरिफ से छूट दी जाएगी.
और भी कई बातों से पीछे हट गए ट्रंप
- ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ नीति का ऐलान किया और उस दिन को उन्होंने लिबरेशन डे कहा. इस बार उन्होंने टैरिफ कैसे कैलकुलेट होगा इसका अलग फॉर्मूला बताया. पहले अलग बताया था.
- 31 मार्च को प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा था कि विदेशी सामानों पर लगने वाले टैरिफ में किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी.
- लेकिन बाद में कॉपर, दवाएं, सेमीकंडक्टर्स और कुछ एनर्जी प्रोडक्ट को छूट दी गई.
- 9 अप्रैल को शेयर बाजार में गिरावट आई, जब टैरिफ लागू किए गए.
- मार्केट इतनी बुरी तरह क्रैश हुआ कि अधिकतर देशों के लिए टैरिफ को 90 दिनों के लिए रोक दिया गया.
- 16 मई को एक और बड़ा मोड़ आया जब ट्रंप ने संकेत दिया कि बिना व्यापार समझौते के भी वे नए टैरिफ रेट लागू कर सकते हैं.
- 30 मई को उन्होंने स्टील पर शुल्क बढ़ाकर 50% करने की घोषणा कर दी, जो 4 जून से लागू होना तय है. अब देखना होगा कि 4 जून को टैरिफ को लेकर क्या होगा.
ट्रंप की टैरिफ नीति में यह बार-बार बदलाव होने से अमेरिकी बिजनेसमैन तो असमंजस में रहे ही साथी पूरी दुनिया भी अनिश्चितता के दौर से गुजरती रही और आज भी अनिश्चितता बनी हुई है.


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