ललिता यादव ने किया है संघर्ष, सेवा को बनाया है अपना ध्येय

 

पैराशूट से उतरकर या वंशवाद से निकलकर उन्होंने अपनी जगह नहीं बनाई, जनसेवा का रास्ता अपनाकर खुद की जमीन तलाश की और खुद को साबित किया। स्थानीय स्तर की सियासत से लेकर प्रदेश के मंत्री पद पर रहते हुए भी ललिता यादव ने अपने काम, व्यवहार और लोगों के लिए समर्पण को हमेशा जिंदा रखा। उनकी इन्हीं भावनाओं और जन के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उन्हें एक बार फिर चुनाव मैदान दिया है। उम्मीद, भरोसे और आत्मविश्वास ने उन्हें फिर विजय पताका लहराने की हिम्मत दी है।
ललिता यादव अपने सियासी कार्यकाल में स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर की कई जिम्मेदारियों को पूरा करने में खुद को साबित कर चुकी हैं। भाजपा महिला मोर्चा, नगर परिषद अध्यक्ष, बुंदेलखंड विकास प्राधिकारण जैसी संस्थाओं से कदम बढाते हुए ललिता यादव ने वर्ष 2008 के चुनाव में लंबी छलांग लगाई और छतरपुर विधानसभा से विजय पताका लहराई। इसके साथ ही उन्हें भाजपा सरकार ने कई विभागों की बड़ी जिम्मेदारियां देतेहुए मंत्री पद से भी नवाजा। वे संभवतः पहली महिला थीं, जिन्हें पहली बार के चुनाव के साथ ही मंत्री पद दिया गया था।  

फिर मिला मैदान
भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव में ललिता यादव पर फिर भरोसा जताया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के मौजूदा विधायक आलोक चतुर्वेदी से होने वाला है। लेकिन आलोक के लचर कार्यकाल और ललिता के मजबूत इरादों के बीच इस मुकाबले को एक तरफा माना जा रहा है। ललिता अपने साथ विकास के बड़े इरादे और क्षेत्र की जनता के लिए सदैव समर्पण के मजबूत वादे लेकर मौजूद हैं। जिसका नतीजा उनके हिस्से बड़ी जीत आने की संभावनाएं प्रबल बनी दिखाई देने लगी हैं। क्षेत्रीय मतदाताओं का कहना है कि काठ की हंडी को एक बार उबाल मिल सकता है, लेकिन वे दोबारा किसी बहलावे, फुसलावे या कांग्रेस की दोगलाई के शिकार होने को राजी नहीं हैं।

किया सभी वर्गों का विकास
ललिला यादव ने अपने मंत्रित्व काल में अल्पसंख्यक कल्याण, पिछडा वर्ग, घुमक्कड जाति समेत कई वर्गों केविकास और सुविधाओं के लिए कई ऐसे काम किए हैं, जो मील का पत्थर साबित हुए हैं। उनका अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में रहना आज भी मप्र वक्फ बोर्ड, मप्र राज्य हज कमेटी, मसाजिद कमेटी आदि में कई बेहतर कामों की वजह से याद किया जाता है। इन कामों को अब न भूतो और न भविष्य की तहरीर के साथ रेखांकित किया जाने लगा है।