प्रदेश अध्यक्ष के बढ़ते कद से विरोधी चिंतित
भोपाल। अगले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की जमीन तैयार कर रहे प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की ही सिसासी जमीन खिसकाने के लिए कांग्रेस में ही बड़ा खेमा पनप रहा है। पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बाद केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिसंबर 2023 में कमलनाथ को हटाकर पटवारी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद से ही पटवारी अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के निशाने पर हैं। अब पटवारी से नाराज नेताओं के संरक्षण में बड़ा गुट तैयार हो गया है। जो निकट भविष्य में पटवारी की परेशानियां बढ़ा सकता है। खासकर पटवारी को संगठनात्मक स्तर पर अफसल करने की कोशिशें पार्टी के भीतर हो रही हैं।इसी महीने साल के शुरू में ही प्रदेश कांग्रेस मीडिया टीम का ऐलान किया था। टीम में घोषित चेहरों को लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक विरोध दर्ज कराया गया। जिसके बाद पार्टी को घंटे भर के भीतर ही मीडिया टीम की घोषणा को स्थगित करना पड़ा था। यह मामला शांत नहीं पड़ा, इसी बीच पार्टी के दो वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का यह बयान सामने आया कि प्रदेश कांग्रेस में समन्वय की कमी है। इस बयान को पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथक की मौन सहमति थी, लेकिन विरोध तेज होता उससे पहले ही कमलनाथ ने ‘मेरी पटवारी से चर्चा होती है’ वाला बयान देकर स्थिति को संभाल लिया था। लेकिन पार्टी के भीतर पटवारी विरोधी खेमा इसे फिर से भुनाने के लिए मौके की तलाश में है। चूंकि 27 जनवरी को हाईकमान को महू में अंबेडकर रैली में आना था। इसलिए कांग्रेस का अंदरूनी विरोध शांत पड़ गया।
मौका मिलते ही पटवारी को घेरा
जीतू पटवारी को प्रदेशाध्यक्ष की कमान मिले 13 महीने बीत चुके हैं। पार्टी नेतृत्व ने पटवारी को मप्र कांग्रेस की कमान बेहद मुश्किल हालातों में सौंपी थी। तब से ही पटवारी का विरोधी खेमा सक्रिय है। पिछले साल जब अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सभी 29 सीटें हार गईं थी। तब विरोधियों ने एक बार फिर पटवारी का तीखा विरोध किया था। जिसमें हार के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की गई थी। चूंकि कांग्रेस पार्टी देशभर में चुनाव हारी। इसलिए किसी एक प्रदेशाध्यक्ष के सिर हार का ठीकरा फोडऩा पार्टी को उचित नहीं लगा। इसलिए विरोधियों की मांग भी ठुकरा दी गई थी। हालांकि तब जिन नेताओं ने हार के लिए पटवारी को जिम्मेदार ठहराया था, वे भी खुद लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी थे और अपनी सीट नहीं जिता पाए थे। लोकसभा चुनाव के दौरान जब कांग्रेस पार्टी से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता दूसरे दलों में जा रहे थे, तब भी विरोधी पटवारी पर हमलावर बने हुए थे। अमरवाड़ा उपचुनाव में हार के लिए भी पटवारी पर ठीकरा फोड़ा गया था। हालांकि केंद्रीय नेत्त्व का पटवारी पर भरोसा बरकरार है।
उपचुनाव में जीत से बढ़ा कद
दो महीने पहले विजयपुर और बुधनी विधानसभा उपचुनाव हुए थे। जिनमें विजयपुर में कांग्रेस और बुधनी में भाजपा जीती थी। विजयपुर में कांग्रेस से भाजपा में गए रामनिवास रावत भाजपा के टिकट पर कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा से चुनाव हारे थे। विजयपुर उपचुनाव की जीत से पटवारी के विरोधियों को तगड़ा झटका लगा था। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि यदि कांग्रेस विजयपुर और बुधनी दोनों उपचुनाव हारती तो विरोधी गुट पटवारी का इस्तीफा मांगने के लिए खुलकर सडक़ पर उतरने की तैयारी कर चुका था।


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