जयशंकर का सख्त संदेश: 'एक साथ नहीं बहेंगे खून और पानी'
लोकसभा के बाद जब आपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष ने राज्यसभा में मोर्चा खोला, तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर न सिर्फ तथ्यों से लैस थे, बल्कि उनका लहजा भी आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से भरा था। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब किसी आतंकी हमले के बाद सिर्फ निंदा नहीं करता, बल्कि कार्रवाई करता है। जवाब ऐसा कि पूरी दुनिया देखे। उन्होंने ऑपरेशन की बारीकियां साझा करते हुए यह भी बताया कि सरकार की नीति अब ‘प्रतीक्षा और प्रतिक्रिया’ नहीं, बल्कि ‘पहचान और प्रत्युत्तर’ की है। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी को चीन गुरु कहा। जयशंकर ने एक निर्णायक मोड़ पर बात करते हुए बताया कि भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश दिया कि अब खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे।
सिंधु समझौते को इतिहास की सबसे उदार और असंतुलित संधियों में गिनते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जब देश पर हमले हो रहे हों, तब उदारता की कोई जगह नहीं बचती। पाकिस्तान की जल निर्भरता को दबाव का हथियार बनाकर भारत ने कूटनीति और भू-राजनीति का अनोखा मेल प्रस्तुत किया। सिंधु संधि की बात आते ही जयशंकर ने सीधा इतिहास में प्रवेश किया और नेहरू सरकार की नीतियों पर गहरी चोट की। उनका कहना था कि कौन-सा राष्ट्र अपनी जीवनरेखाओं को किसी अन्य देश के हवाले करता है? यह कोई दयालुता नहीं, रणनीतिक भूल थी। जयशंकर ने कहा कि आज जब भारत इस संधि को स्थगित करता है, तब यह जरूरी है कि जनता को उस ऐतिहासिक भूल की जानकारी हो, जो दशकों से भारत को रणनीतिक रूप से कमजोर करती रही।


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