राजधानी में 388 झुग्गियां हटाने की कवायद शुरू
कांग्रेस सडक़ से सदन तक करेगी लड़ाई
भोपाल । भोपाल में 1800 एकड़ में फैली कुल 388 झुग्गी हटाने के प्रयास फिर से शुरू हुए हैं। पहले फेस में वल्लभ भवन के आसपास की झुग्गी हटेगी, इसके लिए सर्वे पूरा हो गया है। इसी बीच कांग्रेस ने झुग्गी हटाने का विरोध जताया है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि सडक़ से लेकर सदन गरीबों के हक़ की लड़ाई लड़ी जाएगी, सरकार पहले लोगों को पक्के मकान बनाकर दें। उन्होंने कहा कि झुग्गी मुक्त के नाम पर आवास मुक्त करने का हम विरोध करते हैं। पूर्व मंत्री शर्मा वल्लभ नगर में बस्ती के सामने लोगों से मिलने पहुंचे थे। निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान, शोएब खान, कांग्रेस झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निकेश सिंह चौहान, पूर्व पार्षद दिलीप राय, वार्ड अध्यक्ष राम सुशील सेन, नईम बैग, मिलिंद खंडेले, रईस खान, बाबर खान आदि भी मौजूद थे। झुग्गियों को हटाने के विरोध में कांग्रेसी पांच नंबर मार्केट में भी धरना दे चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार पहले लोगों को आवास बनाकर दें, फिर हटाए।
तीन महीने पहले सीएम ने की थी मीटिंग
भोपाल को झुग्गी मुक्त करने के लिए करीब तीन महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने मीटिंग की थी। उन्होंने झुग्गियों को हटाने के लिए विस्तृत प्लान बनाने को कहा था। उन्होंने कहा था कि पहले भवन तैयार करें। फिर झुग्गियों को खाली कराए, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
कई प्राइम लोकेशन पर बनी हैं झुग्गी
भोपाल में चाहे राजभवन से सटे इलाके में 17 एकड़ में फैली रोशनपुरा बस्ती हो या बाणगंगा, भीम नगर, विश्वकर्मा नगर जैसी 8 झुग्गी-बस्तियां शहर के बीच प्राइम लोकेशन पर करीब 300 एकड़ में फैली हैं। इनके अलावा राहुल नगर, दुर्गा नगर, बाबा नगर, अर्जुन नगर, पंचशील, नया बसेरा, संजय नगर, गंगा नगर, बापू नगर, शबरी नगर, ओम नगर, दामखेड़ा, उडिय़ा बस्ती, नई बस्ती, मीरा नगर जैसी कुल 388 बस्तियां शहर में हैं। इन सबकी जमीन का हिसाब लगाए तो यह करीब 1800 एकड़ के आसपास हैं। इनमें से ज्यादातर पॉश इलाकों में ही हैं।
8 महीने में भदभदा में झुग्गियां हटाई गई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने इसी साल भोपाल की भदभदा बस्ती से कुल 384 झुग्गियां हटा दी थीं। 4 दिन चली कार्रवाई के दौरान सियासत भी खूब गरमाई। दूसरी ओर राजधानी में अभी भी हजारों ऐसी झुग्गी हैं, जो सरकारी जमीन पर तान दी गई हैं। यही कारण है कि पिछले 4 साल में 20 इलाकों में नई बस्ती डेवलप हो गई। आरिफ नगर में तो 500 से ज्यादा झ्ग्गी बन गई हैं। डीआईजी बंगला चौराहे से करोद चौराहे की ओर जाने वाले रास्ते पर रेलवे ओवरब्रिज की शुरुआत पर ही झुग्गी नजर आती हैं। यही तस्वीर बाकी जगहों पर भी देखने को मिल सकती हैं।
अब जानते हैं, कब-कब चला अभियान
करीब 40 साल में 3 बार राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाने का अभियान चला। इस दौरान 1450 करोड़ रुपए खर्च भी किए गए। फिर भी शहर में झुग्गी-बस्तियों के इलाकों की संख्या बढ़ती गई। 3 साल पहले तक इनकी संख्या 72 थी, जो अब करीब 85 हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार-सबसे ज्यादा झुग्गी वाले देश के टॉप-10 शहरों में मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, लखनऊ, कोलकाता, नागपुर, अहमदाबाद, बेंगलूरु के साथ भोपाल भी शामिल रहा हैं।


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