अक्षत कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का जन सैलाब
*अक्षत कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का जन सैलाब*
*जगह-जगह आरती उतार कर अक्षत कलश का पुष्प वर्षा से किया भव्य स्वागत*
भैंसदेही रविवार विश्व हिन्दु परिषद के नेतृत्व में राम जन्मभूमि अयोध्या से आए सिद्ध अभिमंत्रित अक्षत कलश के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा बाजार चौक स्थित राम मंदिर से प्रारंभ हुई और नगर के प्रमुख मार्गो से होकर वापस राम मंदिर पहुंची। शोभायात्रा के दौरान अक्षत कलश पर धर्मप्रेमियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा की। शोभायात्रा का शुभारंभ श्री राम मंदिर से विधिवत्त मंत्रोच्चारण के साथ किया गया। शोभायात्रा में सैकड़ो की संख्या में धर्म प्रेमी श्री राम, जय राम, जय जय राम के मंत्र का जाप करते हुए चल रही थी। हर घर से अक्षत कलश की आरती उतारी गई तथा पुष्प वर्षा से यात्रा का स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान कहा कि विश्व में अनेकों पथ, मत, संप्रदाय हैं, लेकिन विश्व मंगल की कामना करने वाला एकमात्र धर्म सनातन धर्म ही है। हम सबके आराध्य, हम सबके मन में बसने वाले श्री रामचंद्र भगवान के नूतन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने वाली है। इसके लिए इस अक्षत को लेकर प्रत्येक हिंदू के पास जाना है। हमारी जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। हम सबको वानर सेवा के रूप में यह कार्य को संपन्न करना है। शोभायात्रा के चल समारोह का प्रदर्शन भी किया गया। यात्रा का समापन वापस राम मंदिर में भगवान श्री राम की भव्य आरती एवं प्रसादी वितरण के साथ हुआ।
*हर घर के सामने सजाई रंगोली*
अक्षत कलश यात्रा के स्वागत के लिए शहर के हर घर के सामने रंगोली बनाई गई थी। वहीं अक्षत कलश पर पुष्प वर्षा से ऐसा लग रहा था मानो आज दीपावली पर्व हो। गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा में सैकड़ों की संख्या में राम भक्त प्रभु श्रीराम के नाम का जाप कर चल रहे थे। इससे पूरा नगर राम नाम के जयघोषों से गुंजायमान हो गया। कलश यात्रा के चल समारोह के साथ-साथ बड़ी संख्या में पुरूष वर्ग भी शामिल हुआ।
*धर्मप्रेमियों ने की मिठाई और जलपान की व्यवस्था*
अक्षत कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए धर्मप्रेमियों द्वारा नगर के बस स्टैंड पर जलपान और मिठाई की व्यवस्था की गई थी। बाजार चौक पर धर्म प्रेमियों ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को मिठाई बांटी और श्रीराम मंदिर के निर्माण की बधाई दी। कलश यात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस यात्रा में न सिर्फ पुरूष, बल्कि बुजूर्ग और बच्चे भी शामिल हुए, जिनके मुख पर भगवान श्री राम का नाम और मुक्तकंठ से जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।