जापान में महाभूकंप का अलर्ट, इसका असर हो सकता है भारत तक?
टोक्यो। जापान में हाल ही में 7.5 (बाद में 7.6 से बदलकर) तीव्रता का भूकंप आया, जिसने सड़क, बिजली और मकानों को नुकसान पहुँचाया और 70 सेंटीमीटर तक सुनामी लहरें भी आईं। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने ऑफ द कोस्ट ऑफ होक्काइडो एंड सैनरिकु सबसीक्वेंट अर्थक्वेक एडवाइजरी नामक एक विशेष अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट 7.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के बाद सक्रिय होता है। इसका मतलब है कि अगले सात दिनों तक 8 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के आने की संभावना सामान्य से अधिक है, हालांकि इसकी कुल संभावना अभी भी कम है। यह महाभूकंप मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सुनामी और झटकों का खतरा पैदा करेगा, जिससे जापान, रूस का सुदूर पूर्व और संभवतः अलास्का के कुछ हिस्से प्रभावित होगा।
भारत पर असर
जानकारी के अनुसार, भारत पर जापान के इस महाभूकंप का कोई खास असर होने की संभावना नहीं है। रिसर्चों से पता चलता है कि जापान-ट्रेंच प्रकार की घटनाओं से उत्पन्न ऊर्जा प्रशांत महासागर में केंद्रित होती है। हिंद महासागर और भारत मुख्य रूप से सुंडा (जावा) ट्रेंच जैसे सबडक्शन ज़ोन के साथ आने वाले मेगाथ्रस्ट भूकंपों से प्रभावित होते हैं। भारत में अब तक की सबसे भीषण सुनामी 2004 में सुमात्रा के पास आए 9.1 तीव्रता के भूकंप के बाद आई थी। प्रशांत महासागर में आए भूकंपों से भारत में कोई खास असर नहीं पड़ा है। भारतीय वैज्ञानिक भारत के तटों के लिए सुंडा ट्रेंच और अरब सागर को सुनामी का मुख्य स्रोत मानते हैं। जापान की यह चेतावनी भारत के लिए साझा टेक्टोनिक संवेदनशीलता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के महत्व को दर्शाती है, लेकिन इससे आने वाले दिनों में भारतीय तटों पर सुनामी या भूकंप के खतरे के बढ़ने का कोई संकेत नहीं मिलता है।
जापान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
जापान एक इसतरह के क्षेत्र में स्थित है जहाँ पैसिफिक प्लेट उत्तरी अमेरिकी और ओखोत्स्क प्लेटों के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन ज़ोन कहते हैं। जापान और कुरिल ट्रेंच के साथ, ये प्लेटें बहुत अधिक दबाव जमा करती हैं, जो कभी-कभी बड़े मेगाथ्रस्ट भूकंपों के रूप में बाहर आता है।


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