मोती वार्ड के एक मकान में मिले दुर्लभ प्रजाति के बार्न आऊल के 5 बच्चें 

संरक्षण के लिए सफारी मुकुन्दपुर वनमंडल सतना भेजेगा वन विभाग


 

बैतूल। शहर के मोती वार्ड के एक मकान से दुर्लभ प्रजाति के बार्न आऊल (उल्लू) के 5 बच्चों का रेस्क्यू किया गया है। वनमंडलाधिकारी दक्षिण बैतूल से मिली जानकारी के अनुसार 29 नवंबर को दोपहर 2 बजे मोती वार्ड टिकारी निवासी प्रकाश ठाकुर बैतूल के मकान से आजाद वार्ड निवासी मोहिनउद्दीन द्वारा रेस्क्यू कर बार्न आऊल (उल्लू) के बच्चों को दक्षिण (सा.) वनमंडल कार्यालय बैतूल में डीएफओ विजयानन्तम टी.आर. एवं उपवनमंडलाधिकारी आमला तरूणा वर्मा तथा स्टॉफ की उपस्थिति में वन विभाग को 05 नग बार्न आऊल (उल्लू) के बच्चों को पूर्ण रूप से स्वस्थ अवस्था में सुपुर्द में किया गया, जिसका मौंका स्थल पर पंचनामा बनाया गया। गौरतलब है कि बार्न आऊल (उल्लू) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में परिशिष्ट 1 के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है। यह पक्षी निशाचर होते है। लगभग सभी छोटे स्तनधारी का शिकार कर अपना भोजन प्राप्त करते है। इनकी श्रवण क्षमता बहुत अधिक होती है। बार्न आऊल (उल्लू) एक दुर्लभ प्रजाति है। रेस्क्यू किये गये बार्न आऊल (उल्लू) के बच्चों को संरक्षण हेतु सफारी मुकुन्दपुर वनमंडल सतना भेजा जा रहा हैं। जानकारो के अनुसार दुर्लभ प्रजाति का बार्न उल्लू दुनिया के कई हिस्सों में मिलता है। भारत में अधिकांश तौर पर पठारी, हिमालयी क्षेत्र में यह उल्लू पाया जाता है। लेकिन कई बार दूसरे हिस्सों में भी देखा जाता है। इसे यहां इंडियन बार्न उल्लू और सफेद उल्लू के नाम से जाना जाता है। भारत में बार्न आउल की संख्या काफी कम है। इसे दुर्लभ उल्लू की श्रेणी में इसे शामिल किया गया है। दुर्लभ प्रजाति का बार्न आउल को आबादी क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया है।