मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से कागजों में पिला रहे पानी


भोपाल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन को मप्र सरकार के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग ने पलीता लगाना शुरू कर दिया है। पीएचई ने प्रदेश की 41 हजार से ज्यादा आंगनबाडिय़ों में नल से पानी देने का दावा किया है। जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग ने पीएचई के आंकड़ों को झुठला दिया है और सिर्फ 6 हजार से ज्यादा आंगनबाडिय़ों में भी नल कनेक्शन होने की बात कही है। इस संबंध में हाल ही में महिला बाल विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक शाह ने पीएचई के अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव को पत्र लिखा है।
महिला एवं बाल विकास के आंकड़ों से जल जीवन मिशन में पीएचई को झूठ उजागर होता दिख रहा है। साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या जल जीवन मिशन के तहत मप्र में सिर्फ कागजों में नल कनेक्शन दिए जा रहे हैं। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पीएचई विभाग ने प्रमुख अभियंता को  जमीनी हकीकत पता लगाने को कहा है। इसको लेकर पीएचई में कल बड़ी बैठक होने जा रही है। दो दिन पहली लिखी गई चिट्ठी में शाह ने उल्लेख किया है कि प्रदेश में 84,465 आंगनबाडिय़ां चल रही हैं, जिसमें पाइप्ड वाटर कनेक्शन (नल से पानी) इसी योजना से उपलब्ध कराना है। जबकि पिछले हफ्ते 6 दिसंबर को पीएचई ने डब्ल्यूसीडी को रिपोर्ट दी कि 41205 आंगनबाडिय़ों में पाइप्ड वाटर कनेक्शन दे दिया गया। यह रिपोर्ट आते ही डब्ल्यूसीडी विभाग के अशोक शाह ने मैदानी अमले से जांच करा ली। चार दिन में हकीकत सामने आ गई कि सिर्फ 6327 आंगनबाडिय़ों में ही पानी की सप्लाई पाइप्ड वाटर कनेक्शन से हो रही है। शाह की चिट्ठी मिलते ही मलय श्रीवास्तव ने तकनीकी शाखा के साथ विभाग के प्रमुख अभियंता से कहा कि वे 14 दिसंबर की शाम से पहले ताजा स्थिति जुटा लें। इसी दिन फिर दोनों विभागों के साथ बैठक होगी।