महंगाई के इस दौर में ज्यादातर गाड़ियां लोन पर ली जाती हैं। ज्यादातर ग्राहक अपनी कार किस्तों में खरीदते हैं। कार लेते वक्त कार का इंश्योरेंस भी जरूरी है। इंश्योरेंस के नाम पर लोग आपको ठगने की कोशिश करते हैं। आपके लिए यह एक जिम्मेदारी है कि आपने कार की सुरक्षा कैसे प्लान की हुई है। कार इंश्योरेस हमेशा आपको एक्सीडेंट या चोरी जैसी घटनाओं से होने वाली परेशानियों से बचाता है।

इंश्योरेंस की तुलना करें  आजकल बाज़ार में ढेरों कंपनियां इंश्योरेंस पॉलिसी देते हैं। लेकिन स्मार्ट ग्राहक बनकर यह जानना जरूरी है कि कौन सी कंपनी क्या दे रही है। आपको सभी कंपनियों की पॉलिसीज के पैसों की तुलना करनी चाहिए। आप बाकी कंपनियों से कार के डीलर की इंश्योरेंस पॉलिसी की तुलना कर सकते हैं। जो भी पॉलिसी आपको अपनी जरूरत के हिसाब से सही लगे आप चुन सकते हैं। इंश्योरेंस में बाकी कंपनियों की फीचर्स की तुलना कर लें। कौन सी कंपनी क्या दे रही है, कहां क्या मिल रहा है, कहां क्या नहीं। सभी कंपनियों के इंश्योरेंस का नियम होता है जो फॉलो करना होता है।

इंश्योरेंस में क्या क्या कवर है इसे भी देखें  जितेन्द्र सोलंकी कहते हैं इंश्योरेंस में कुछ चीजें फुल कवर होती हैं कुछ पार्टली कवर होती हैं, जबकि कुछ चीजें कवर नहीं होती हैं। इसलिए यह देखना जरूरी है कि आपके इंश्योरेंस में क्या क्या कवर है। इंश्योरेंस में पार्टली कवर में मसलन दरवाजा है, शीशा है बाकी अन्य चीजें भी होती हैं, इसलिए यह देखना जरूरी है कि क्या क्या कवर हो रहा है। इसलिए जब भी आप क्लेम आपका क्लेम उसी हिसाब से लिया जाएगा जितना कवर है।

कार में लगने वाला सामान कहां से लग रहा है अगर कार में लगने वाला सामान जैसे कि टेप या फिर कुछ लगता है तो उसे कार खरीदते वक्त एजेंसी से ही लगवा लें। इससे फायदा यह होगा की कुछ सामान को इंश्योरेंस में कवर कर लिया जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि लोग कार को ज्यागा साज-सजवाट के लिए बाहर से माेडिफाइ करवा लेते हैं। इतना ही नहीं बल्कि इंश्योरेंस कंपनियां भी अपना प्रीमियम बढ़ा देती हैं। इसलिए फिजूल खर्ची से बचने के लिए ऑफ्टर मार्केट कार में काम कराएं।