लंदन । क्रिकेट विश्व कप 30 मई से शुरु होने जा रहा है। 1975 से शुरु हुए विश्व कप के इस सफर में एक से बढ़कर एक मुकाबले देखने को मिले हैं। 

1975 विश्व कप में छाये गिलमौर 
इस टूर्नामेंट में मेजबान इंग्लैंड को आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों डेनिस लिली और जेफ थामसन से खतरे का अंदेशा तो पहले से था पर उसे अनजान से ऑलराउंडर गैरी गिलमौर की स्विंग गेंदबाजी और शानदार बल्लेबाजी ने हरा दिया। इस 23 साल के गेंदबाज ने 14 रन देकर छह विकेट लेकर इंग्लैंड की टीम को 93 रनों पर आउट कर दिया। गिलमौर के प्रदर्शन के बाद हालांकि आस्ट्रेलियाई टीम ने 39 रन पर छह विकेट खो दिये। इसके बाद क्रिस ओल्ड ने अपने घरेलू मैदान हेडिंग्ले में तीन विकेट निकाल दिये। फिर गिलमौर बल्लेबाजी के लिये उतरे। गिलमौर की 28 रन की नाबाद पारी और डग वाल्टर्स के साथ नाबाद भागीदारी से आस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंच गया। 

1983 विश्व कप: कपिल ने रचा इतिहास 
1983 विश्व कप में भारत को जीत दिलाने वाले महान ऑलराउंडर कपिल देव ने इस मैच में इतिहास रच दिया। जिम्बाब्वे ने डंकन फ्लेचर के शादार प्रदर्शन से भारतीय टीम के 17 रन पर ही पांच विकेट गिर गये थे लेकिन भारतीय कप्तान कपिल देव ने 138 गेंद में 175 रन की एतिहासिक पारी खेलकर सबको हैरान कर दिया। इस पारी का आनंद तब मैदान में मौजूद दर्शक ही उठा सके क्योंकि टैक्नीकी कर्मचारियों की हड़ताल से इस मैच को रिकार्ड नहीं किया जा सका और न ही इसका टीवी प्रसारण हो पाया। कपिल की इस शतकीय पारी से भारत ने 266 रन का स्कोर बनाकर जिम्बाब्वे को हराया। । 

1999 विश्व कप का रन आउट 
यह विश्व कप का अब तक का सबसे रोमांचक मैच था, एजबेस्टन में इस सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आस्ट्रेलिया ने 213 रन बनाये इसके बाद जोंटी रोड्स और जाक कैलिस दक्षिण अफ्रीका को जीत की ओर ले जा रहे थे और अंतिम ओवर में उनकी टीम को केवल नौ रन की जरुरत थी। फिर एक रन और एक विकेट बचा था लेकिन ऑलराउंडर लांस क्लूजनर ने गेंद मिड-आफ की ओर खेली और एक रन के लिये भाग लिये। वहीं नान-स्ट्राइकर छोर पर खड़े एलेन डोनल्ड ने उनकी आवाज नहीं सुनी और अपना बल्ला गिरा दिया। मार्क वॉ ने गेंद लेकर इसे गेंदबाज डेमियन फ्लेमिंग की ओर फेंक दिया। फ्लेमिंग ने तुंरत ही इसे विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट की ओर फेंक दिया जिन्होंने रन आउट कर दिया हालांकि यह मैच टाई रहा पर बेहतर नेट रन रेट की बदौलत आस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंच गयी और एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका टीम बदकिस्मत रही।