कोयला मंत्रालय की आरोह रिपोर्ट: बंद होंगी 42 खदानें, पुनर्विकास और नए रोजगार के रास्ते खुलेंगे
नई दिल्ली:देश में खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने और उनके बेहतर पुनर्वास की दिशा में कोयला मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने बुधवार को 'आरोह' नाम से खदान बंद करने से जुड़ी एक विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट का आधिकारिक विमोचन किया। यह प्रकाशन भारत में माइन क्लोजर (खदान बंदी) की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति को रेखांकित करता है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से पारिस्थितिकी की बहाली, पर्यावरण संरक्षण और खनन कार्य समाप्त होने के बाद भूमि के टिकाऊ तथा बहुउपयोगी उपयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें देश की 42 प्रमुख कोयला खदानों को बंद करने का संपूर्ण ब्योरा प्रस्तुत किया गया है।
खनन के अंत को नए आर्थिक और सामाजिक अवसरों की शुरुआत के रूप में देखने की नई सोच
'आरोह' रिपोर्ट के विमोचन के अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खदानों को बंद करने के दृष्टिकोण में आए दूरगामी बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में खदान बंदी के पूरे दर्शन को ही बदल दिया गया है। अब इसे केवल खनन गतिविधियों के औपचारिक समापन के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे राष्ट्रीय और मंत्रालयी स्तर पर प्राथमिकता देते हुए नए आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय अवसरों की शुरुआत माना जा रहा है। यह नया दृष्टिकोण खनन प्रभावित क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है।
क्यूआर कोड और दृश्य दस्तावेजों से सुसज्जित 'आरोह' रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
जारी की गई 'आरोह' रिपोर्ट में शामिल प्रत्येक खदान का एक संपूर्ण और प्रामाणिक प्रोफाइल तैयार किया गया है। इसमें खदान बंदी से जुड़ी प्रमुख पहलों और उनके बाद भूमि उपयोग से निकले सकारात्मक परिणामों का पूरा लेखा-जोखा मौजूद है। रिपोर्ट को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए इसमें खदान क्षेत्रों की पुरानी और कायाकल्प के बाद की तस्वीरों के दृश्य दस्तावेज शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में क्यूआर कोड (QR Code) आधारित वृत्तचित्र वीडियो भी जोड़े गए हैं, जिन्हें स्कैन करके कोई भी व्यक्ति खदान स्थलों के पुनरुद्धार की पूरी परिवर्तन यात्रा को सीधे देख सकता है।
सामुदायिक भागीदारी और सुव्यवस्थित पहलों से सुधर रहा स्थानीय पर्यावरण
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि संरचित सुधार प्रक्रियाओं और व्यवस्थित पारिस्थितिक पहलों के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को ध्यान में रखकर किए गए प्रशासनिक और पर्यावरणीय हस्तक्षेपों ने बंजर पड़े भू-भागों को हरे-भरे और सुरम्य परिदृश्यों में परिवर्तित कर दिया है। इस तरह के दूरदर्शी प्रयासों से न केवल स्थानीय पर्यावरण का संतुलन बहाल हो रहा है, बल्कि आसपास निवास करने वाले नागरिकों को भी स्वच्छ वातावरण और आजीविका के नए साधनों के रूप में व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल रहे हैं।
भारत के विकसित होते माइन क्लोजर ढांचे में 'रिक्लेम' (RECLAIM) मॉडल की अहम भूमिका
यह विशेष प्रकाशन भविष्य के लिए एक बहुमूल्य ज्ञान भंडार के रूप में कार्य करेगा, जो अन्य खदानों के पुनरुद्देश्यीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत का खदान बंदी ढांचा किस प्रकार आधुनिक तकनीकों के साथ लगातार विकसित हुआ है। इस दिशा में कोयला मंत्रालय की 'रिक्लेम' (RECLAIM) जैसी प्रमुख पहलें वैज्ञानिक मूल्यांकन को बढ़ावा दे रही हैं। यह ढांचा सभी हितधारकों की भागीदारी, ज्ञान के आदान-प्रदान और खनन के बाद भूमि के दीर्घकालिक व टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहित करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।


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