वायनाड लैंडस्लाइड में लापता विक्रम राणा की खोज जारी, पांचवें दिन क्या बोली केरल सरकार?
वायनाड। केरल के वायनाड में टनल निर्माण स्थल पर 7 जुलाई को हुए भीषण भूस्खलन के बाद लापता हिमाचल प्रदेश के निर्माण प्रबंधक विक्रम राणा की तलाश का अभियान पांचवें दिन भी जारी है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), फायर एंड रेस्क्यू, पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों की टीमें मीनाचिपुझा नदी और मलबे के ढेरों में लगातार खोजबीन कर रही हैं। हादसे में अब तक सात शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि विक्रम राणा की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है।
खोज अभियान में नई रणनीति और तेजी
बचाव दल ने अब भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के 'जोन-2' पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है। मंत्री टी सिद्धीक के अनुसार, मीनाचिपुझा नदी के पानी का स्तर और स्पष्टता जांचने के बाद वहां तलाशी तेज की गई है। पहले नदी में गाद और मिट्टी के कारण तल नहीं दिख रहा था, लेकिन अब ऊपरी हिस्से में खुदाई रोकने से पानी साफ हो गया है। एनडीआरएफ, टर्की लाइफ रेस्क्यू और फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के सदस्यों ने वीडियो विश्लेषण के आधार पर यह निर्णय लिया है कि जोन-2 में गहराई तक खुदाई की जाए, जिससे लापता प्रबंधक के बारे में कोई सकारात्मक सुराग मिल सके।
बचाव कार्यों के लिए संसाधनों का प्रबंधन
अभियान की सुचारू गति बनाए रखने के लिए सरकार ने संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी है। बचाव दल को पर्याप्त टिपर ट्रक, भारी मशीनरी और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। जिला प्रशासन ने खोज अभियान में बाधा न आए, इसके लिए चूरलमाला-मेप्पाडी मार्ग पर यातायात को नियंत्रित किया है, जहां आवश्यक सेवाओं के अलावा अन्य वाहनों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया है। एनडीआरएफ और जिला प्रशासन मिलकर इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं ताकि लापता व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
मलबा हटाने हेतु विशेषज्ञ समिति का गठन
वायनाड की टनल और टाउनशिप परियोजनाओं में जमा मलबे को वैज्ञानिक तरीके से हटाने के लिए केरल सरकार ने एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति में एनआईटी कालीकट, पर्यावरण विज्ञान केंद्र और राष्ट्रीय भू-विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम मलबे को सुरक्षित स्थानों पर डालने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक विक्रम राणा का पता नहीं चल जाता, तब तक नदी और टनल स्थल पर समानांतर रूप से तलाशी अभियान जारी रहेगा और विशेषज्ञ समिति का मार्गदर्शन इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाएगा।


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