विशेषांक 
 विशेष रिपोर्ट
भैंसदेही 
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे से भैंसदेही को क्या मिलेगा?
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर टिकी जनता की उम्मीदें
भैंसदेही/कुकरू। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संभावित आगमन को लेकर भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। ग्राम कुकरू में क्षेत्रीय विधायक महेंद्र सिंह चौहान की मौजूदगी में कलेक्टर बैतूल एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें दौरे की तैयारियों और विकास कार्यों की समीक्षा की गई।
लेकिन प्रशासनिक तैयारियों के बीच क्षेत्र की जनता के मन में एक बड़ा सवाल है—क्या इस दौरे से भैंसदेही को केवल घोषणाएं मिलेंगी या वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान भी मिलेगा?
सबसे बड़ा मुद्दा—रोजगार
भैंसदेही और आठनेर आदिवासी अंचल की सबसे बड़ी समस्या रोजगार है। हर साल हजारों परिवार आठ से दस महीने तक रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।
कृषि के अलावा क्षेत्र में रोजगार के साधन लगभग नहीं हैं। न बड़े उद्योग हैं, न ही स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर। यदि क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योग, वन उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयां, पर्यटन विकास, कौशल विकास केंद्र और लघु उद्योग स्थापित किए जाएं, तो हजारों युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सकता है।
शिक्षा—खामला के बच्चों का सवाल
ग्राम खामला, जो तहसील मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां के विद्यार्थियों के सामने 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चे, विशेषकर बेटियां, आर्थिक और परिवहन की समस्याओं के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पातीं। क्षेत्रवासियों की मांग है कि खामला क्षेत्र में 11वीं-12वीं की शिक्षा, हायर सेकेंडरी स्कूल, छात्रावास और भविष्य में कॉलेज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सवाल यही है—यदि स्कूल नहीं होगा तो गांव के बच्चे आगे पढ़ेंगे कहां?
स्वास्थ्य—अब बड़े शहरों की दौड़ कब तक?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैंसदेही में आज भी सीटी स्कैन, सोनोग्राफी और अन्य आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव है। गंभीर मरीजों को बैतूल, नागपुर और महाराष्ट्र के अन्य शहरों तक जाना पड़ता है।
जनता चाहती है कि भैंसदेही को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और अत्याधुनिक जांच मशीनों की सौगात मिले।
जनता की मांग, राजनीति नहीं विकास
क्षेत्र में नाम परिवर्तन को लेकर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन आम नागरिकों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और पर्यटन विकास है।
मुख्यमंत्री का संभावित दौरा भैंसदेही के लिए विकास की नई दिशा साबित होगा या केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह जाएगा, इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।
फिलहाल पूरे आदिवासी अंचल की निगाहें इस दौरे पर टिकी हैं और जनता को उम्मीद है कि इस बार घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर विकास दिखाई देगा।