मार्केट के उतार-चढ़ाव का असर: भारी संख्या में बंद हुए पुराने SIP, पर कुल निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
मुंबई | भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग से इन दिनों निवेश के कुछ ऐसे अनोखे और दिलचस्प आंकड़े सामने आ रहे हैं, जो पहली नजर में किसी को भी हैरान कर सकते हैं। बाजार में एक तरफ जहां सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को बंद करने या समय से पहले रोकने वाले रिटेल निवेशकों की तादाद ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर है, वहीं दूसरी तरफ एसआईपी के माध्यम से म्यूचुअल फंड में आने वाला मासिक निवेश हर महीने सफलता की नई इबारत लिख रहा है। इस विरोधाभासी स्थिति ने बाजार के विश्लेषकों और आम निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
एसआईपी स्टॉपेज रेशियो शत-प्रतिशत के पार, फिर भी इनफ्लो मजबूत
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में पिछले दो महीनों से एसआईपी स्टॉपेज रेशियो लगातार सौ फीसदी की लक्ष्मण रेखा को पार कर रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में जितने नए एसआईपी खाते खोले जा रहे हैं, उसकी तुलना में बंद होने या मैच्योर (पूरे) होने वाले खातों की संख्या कहीं अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के महीने में जहां पचास दशमलव सात एक लाख नए एसआईपी का पंजीकरण हुआ, वहीं इसके मुकाबले इक्यावन दशमलव दो नौ लाख खाते बंद या रोके गए, जिससे स्टॉपेज रेशियो एक सौ एक प्रतिशत पर पहुंच गया। इसके बावजूद, इस दौरान बाजार में कुल एसआईपी निवेश इकतीस हजार एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया।
म्यूचुअल फंड एसेट में जबरदस्त उछाल, निवेशकों के व्यवहार में आया बदलाव
इस उठापटक के बीच राहत की बात यह है कि देश में कुल सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या अभी भी नौ करोड़ पैंसठ लाख के मजबूत स्तर पर बनी हुई है। इसके साथ ही, एसआईपी के तहत कुल प्रबंधित परिसंपत्तियां (AUM) बढ़कर सोलह दशमलव आठ पांच लाख करोड़ रुपये हो चुकी हैं, जो पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग का लगभग बीस दशमलव छह प्रतिशत है। यूटीआई एएमसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (इक्विटी) अमित प्रेमचंदानी के अनुसार, यह रुझान म्यूचुअल फंड से भरोसा उठने का संकेत नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि भारतीय रिटेल निवेशक अब काफी गतिशील (डायनेमिक) हो गए हैं। लोग पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिए एक फंड से निकलकर दूसरे अच्छे फंड में जा रहे हैं, फोलियो का एकीकरण कर रहे हैं या फिर एक्टिव फंड्स की जगह पैसिव फंड्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
युवा निवेशकों का धैर्य और तकनीकी प्लेटफॉर्म्स का नया विकल्प
बाजार के जानकारों का कहना है कि एसआईपी बंद करने का यह चलन ज्यादातर उन युवाओं और नए निवेशकों में देखा जा रहा है जो सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करते हैं और जिनकी निवेश राशि अपेक्षाकृत कम होती है। निफ्टी-पचास में हाल ही में आई गिरावट के कारण इन नए निवेशकों के सब्र का इम्तिहान हुआ है। हालांकि, कुल निवेश राशि के रिकॉर्ड स्तर पर रहने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली यह कि छोटे निवेशक भले ही पैनिक होकर एसआईपी रोक रहे हों, लेकिन पुराने और अनुभवी निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव को भांपकर अपना निवेश और बढ़ा रहे हैं। दूसरी वजह यह है कि आजकल कई फिनटेक ऐप्स पर ऑटोमेटेड लम्पसम (एकमुश्त निवेश) की सुविधा मिल रही है, जो तकनीकी रूप से एसआईपी के आंकड़ों में दर्ज नहीं होती, लेकिन इसके जरिए नियमित निवेश बाजार में लगातार आ रहा है।


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