शंख बजाने का सही समय और फायदे जान लेंगे तो पूजा में कभी नहीं करेंगे इसे नजरअंदाज
धार्मिक अनुष्ठानों में शंख का विशेष महत्व माना जाता है. लगभग हर मंदिर और पूजा-पाठ में शंख की ध्वनि सुनाई देती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा के दौरान शंख बजाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है? ज्योतिष शास्त्र में भी शंख को बेहद शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि नियमित रूप से शंख बजाने से घर का वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
आज के समय में जब लोग मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक कलह जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब कई ज्योतिषाचार्य पूजा में शंख बजाने की सलाह देते हैं. कहा जाता है कि इसकी पवित्र ध्वनि वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर सकारात्मक कंपन पैदा करती है. यही वजह है कि सदियों से भारतीय संस्कृति में शंख को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है.
ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है शंख?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शंख का संबंध भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से माना जाता है. भगवान विष्णु के चार प्रमुख आयुधों में शंख भी शामिल है. मान्यता है कि जहां नियमित रूप से शंख बजाया जाता है, वहां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और आर्थिक संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं.
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि शंख की ध्वनि नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम करने में मदद करती है. खासकर यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या राहु-केतु से जुड़े दोष हों, तो नियमित शंखनाद लाभकारी माना जाता है.
शंख की आवाज का धार्मिक महत्व
1. नकारात्मकता को दूर करने में मददगार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख की आवाज से आसपास मौजूद नकारात्मक शक्तियां और अशुभ ऊर्जा दूर भागती हैं. यही कारण है कि सुबह और शाम की आरती के समय शंख बजाने की परंपरा चली आ रही है. कई लोग यह अनुभव भी साझा करते हैं कि नियमित पूजा और शंखनाद के बाद घर का माहौल पहले की तुलना में अधिक शांत और सुखद महसूस होने लगता है. ज्योतिष में इसे सकारात्मक ऊर्जा के बढ़ने का संकेत माना जाता है.
2. मानसिक शांति और आत्मविश्वास
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शंख की ध्वनि मन को स्थिर करने में मदद करती है. जब व्यक्ति रोजाना पूजा के दौरान शंख बजाता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होने लगता है. यह आदत मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक मानी जाती है.
3. धन और समृद्धि से जुड़ा है शंख
माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई धार्मिक उपाय बताए गए हैं, जिनमें शंख का विशेष स्थान है. मान्यता है कि दक्षिणावर्ती शंख घर में रखना और नियमित रूप से उसकी पूजा करना आर्थिक उन्नति का मार्ग खोल सकता है. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार शुक्रवार और एकादशी के दिन शंख पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है. इससे धन आगमन के नए अवसर बनने की संभावना बढ़ती है और खर्चों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है.
ग्रह दोषों को कम करने में माना जाता है प्रभावी
1. चंद्रमा को मजबूत करने का उपाय
कुंडली में कमजोर चंद्रमा व्यक्ति को मानसिक रूप से अस्थिर बना सकता है. ज्योतिष में माना जाता है कि नियमित शंखनाद से चंद्रमा की शुभता बढ़ती है और मन में स्थिरता आती है.
2. राहु-केतु के प्रभाव में राहत
जिन लोगों को बार-बार बाधाओं, भ्रम या अनावश्यक तनाव का सामना करना पड़ता है, उन्हें पूजा में शंख बजाने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इससे राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकते हैं.
3. शंख बजाते समय रखें इन बातों का ध्यान
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शंख हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए. पूजा के समय स्नान के बाद ही शंख बजाना शुभ माना जाता है. टूटा हुआ या क्षतिग्रस्त शंख घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना गया है.
इसके अलावा शंख बजाने से पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करना भी लाभकारी माना जाता है. सुबह और शाम के समय किया गया शंखनाद सबसे अधिक शुभ फल देने वाला बताया गया है.


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