"बाजार में सुस्ती बरकरार: सेंसेक्स 508 अंक गिरकर बंद, 23,400 के नीचे पहुंचा निफ्टी"
मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन जबरदस्त उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। सोमवार को मजबूती के साथ हरे निशान पर शुरुआत करने के बावजूद, बिकवाली के भारी दबाव के चलते दोनों बेंचमार्क सूचकांक अंततः लाल निशान में डूबकर बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.67% का गोता लगाकर 74,267.34 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 165.16 अंक (-0.70%) फिसलकर 23,382.60 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया भी 12 पैसे कमजोर होकर 94.97 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।
एचयूएल और श्रीराम फाइनेंस के शेयर टूटे, बिकवाली का रहा बोलबाला
सोमवार के ट्रेडिंग सेशन के दौरान दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी मुनाफावसूली देखी गई। खासतौर पर हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और श्रीराम फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर करीब तीन फीसदी तक टूट गए। एनएसई (NSE) पर दिनभर के कारोबार के बाद बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह निगेटिव नजर आया; जहां 2,201 शेयर गिरावट के लाल निशान के साथ बंद हुए, वहीं केवल 1151 शेयरों में ही तेजी दर्ज की जा सकी। इसके अलावा, 99 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया और वे स्थिर रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक कारणों से सहमे निवेशक
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। पश्चिम एशिया के इस संकट से जुड़ी पल-पल की खबरों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेजी आ रही है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसे खींचने (बिकवाली करने) और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़ोतरी ने भी घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ने का काम किया है।
उतार-चढ़ाव के बीच सतर्कता बरत रहे हैं ट्रेडर्स
कारोबारियों का मानना है कि जब तक वैश्विक मोर्चे पर भू-राजनीतिक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में ऐसा ही उतार-चढ़ाव बना रहेगा। विदेशी फंडों की लगातार निकासी से बाजार का ऊपरी स्तरों पर टिक पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रिटेल इनवेस्टर्स और शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को फिलहाल आक्रामक पोजीशन बनाने से बचने और फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी जा रही है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेत ही बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।


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