सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए पर जताई नाराजगी, नीति पर उठे सवाल
नई दिल्ली | देश की निजी विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराए और अन्य शुल्कों में किए जाने वाले अनियंत्रित उतार-चढ़ाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान सरकार को कड़ी फटकार लगाई क्योंकि इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार ने अभी तक अपना जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया था। अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह एक विशेष आवेदन के साथ यह स्पष्ट करे कि अब तक जवाब पेश करने में देरी क्यों हुई और बार-बार अतिरिक्त समय की मांग किस आधार पर की जा रही है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने पिछले साल 17 नवंबर को ही इस मामले में सरकार से जवाब तलब किया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी केंद्र की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
स्वतंत्र नियामक संस्था की मांग पर सुनवाई: अगले शुक्रवार तक का दिया अल्टीमेटम
यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें मांग की गई है कि विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और यात्रियों को किराए की लूट से बचाने के लिए एक 'स्वतंत्र नियामक संस्था' का गठन किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि निजी कंपनियां अपनी मर्जी से दाम बढ़ाकर आम आदमी का शोषण कर रही हैं, जिस पर लगाम लगाना जरूरी है। हालांकि केंद्र सरकार ने कोर्ट से तीन हफ्ते का और समय मांगा था, लेकिन पीठ ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि हलफनामा आगामी 8 मई (शुक्रवार) तक हर हाल में दाखिल हो जाना चाहिए। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 11 मई को मुकर्रर की गई है, जिसमें सरकार के जवाब के आधार पर विमानन क्षेत्र के भविष्य और नियामक संस्था के गठन पर अहम फैसला आ सकता है।


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