जब खुले मंच से, ट्रंप ने कह दिया................उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एमबीएस उनकी इतनी चापलूसी कर सकते
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी में हुए हाई-प्रोफाइल निवेश शिखर सम्मेलन में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) को लेकर चौंकाने वाला बयान दे दिया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एमबीएस उनकी इतनी चापलूसी कर सकते हैं, लेकिन अब ऐसा करना पड़ रहा है। इस बयान का मंच भी खास था—सऊदी अरब के सोवरन वेल्थ फंड द्वारा समर्थित फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव, जिसमें दुनिया भर के निवेशक शामिल थे। ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका-सऊदी रिश्तों और खाड़ी क्षेत्र में शक्ति संतुलन की असली तस्वीर दिखाती है। इस मौके पर ट्रंप ने एमबीएस के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों और बातचीत का जिक्र किया, जिसमें क्राउन प्रिंस ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कदमों को जारी रखने की सलाह दी। रिपोर्ट के मुताबिक, एमबीएस ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने जैसे कड़े कदमों का सुझाव दिया। हालांकि, सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इंकार किया कि वह युद्ध को बढ़ावा दे रहा है और कहा कि वह शांतिपूर्ण समाधान और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
इस बयान के पीछे अमेरिका और सऊदी अरब के 80 साल पुराने गठजोड़ का संदर्भ भी है। 1945 में राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी.रूजवेल्ट और किंग अब्दुल अजीज की ऐतिहासिक बैठक से शुरू हुआ यह रिश्ता अमेरिका को सुरक्षा और सऊदी अरब को रणनीतिक स्थिरता देता है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से एमबीएस का मजाक उड़ाया, लेकिन उनकी टिप्पणियों से यह साफ है कि वे खाड़ी देशों के अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े रहे, यहां तक कि नाटो सहयोगियों से भी अधिक समर्थन दिखाया। यह बयान वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों पर असर डाल सकता है, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। ट्रंप की बेबाक टिप्पणी केवल व्यक्तिगत रिश्तों का खुलासा नहीं बल्कि अमेरिका-सऊदी रणनीतिक निर्भरता और मध्य पूर्व की जटिल राजनीतिक स्थिति का भी संकेत देती है। उनके इस बयान ने निवेशकों और राजनयिकों के लिए कई नई चुनौतियां और संभावनाएं पैदा कर दी हैं, और वैश्विक समुदाय की निगाहें अब खाड़ी क्षेत्र पर और अधिक केंद्रित हो गई हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप ने मंच से सार्वजनिक रूप से बताया कि एमबीएस उनके प्रति व्यक्तिगत रूप से चापलूसी कर रहे हैं, लेकिन साथ ही अमेरिका-सऊदी रणनीतिक सहयोग मजबूत बना हुआ है, और मध्य पूर्व में संतुलन बनाए रखने में दोनों देशों की भूमिका अहम है।


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