भोपाल में एक और अजूबा, 90 डिग्री पुल के बाद अब ‘एफिल टावर’ चर्चा में
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में एक के बाद एक अजूबे देखने को मिल रहे हैं. सबसे पहला अजूबा 90 डिग्री का ब्रिज रहा, जो लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा, लेकिन अब एक और नया अजूबा (New Wonder) सामने आया है. भोपाल के करोंद इलाके की विनायक कॉलोनी में सड़क के बीचों-बीच लगा हाई वोल्टेज टावर (Voltage Tower) लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है.
जिस तरह से सड़क के बीच टावर खड़ा किया गया है, उसकी ऊंचाई और लंबाई दोनों ही कम हैं, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही में दिक्कत होती है. वहीं करंट के खतरे के चलते रहवासी डरे हुए जिंदगी जीने को मजबूर हैं. रहवासियों का कहना है कि बारिश के दिनों में इस सड़क से निकलना बेहद डरावना हो जाता है.
रहवासियों का कहना है कि हाई वोल्टेज टावर के नीचे से गुजरना बारिश के मौसम में और भी खतरनाक हो जाता है. ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज लाइन और नीचे हमेशा बनी रहने वाली करंट की आशंका लोगों में डर पैदा करती है. आम लोगों का दावा है कि हर साल यहां एक-दो लोगों की करंट की चपेट में आकर मौत भी हो जाती है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह समस्या करीब 20 वर्षों से बनी हुई है. इतने लंबे समय में न तो यहां सड़क का सही निर्माण किया गया और न ही इस जानलेवा हाई वोल्टेज टावर को हटाया गया. रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है.
इस मामले में बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव का कहना है कि ये मामला फिलहाल संज्ञान में आया है. मामले की विभाग द्वारा जांच-पड़ताल करवाई जा रही है. जो भी समाधान होगा, वो किया जाएगा. वहीं कांग्रेस नेता शहरयार खान का कहना है कि MP सरकार इंजीनियरिंग में नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. पहले 90 डिग्री ब्रिज और अब ये टावर. सरकार को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिए.
बता दें कि इससे पहले भोपाल के ऐशबाग इलाके में 90 डिग्री का ब्रिज काफी चर्चा में था. करीब ₹18 करोड़ की लागत वाला 648 मीटर लंबा और 8.5 मीटर चौड़ा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) अपने खतरनाक 90-डिग्री के तीखे मोड़ के कारण चर्चा में रहा. 2025 में बना यह पुल सुरक्षा जोखिम और डिजाइन खामियों के कारण विवादों में रहा, जिससे इसके निर्माण से जुड़े इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई थी.


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