एक बगिया मां के नाम योजना मे महिला किसानों ने लगाया बगीचा लेकिन तीन महीनो मे भी नहीं हुआ भुगतान, कर्ज लेकर तैयार की एक बगिया 

बैतूल l एक बगिया मां के नाम" मध्य प्रदेश सरकार की एक योजना है, जो स्व-सहायता समूह  की महिलाओं किसानों को  अपनी निजी भूमि के एक एकड़ पर फलदार बगीचे लगाने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता देती है, ताकि महिला सशक्तिकरण हो और उनकी आजीविका बढ़े, जिसमें पौधे, खाद, सिंचाई, फेंसिंग और जलकुंड के लिए सरकार राशि  देती है और मनरेगा के तहत काम किया जाता है। लेकिन अब इस योजना मे ग्रामीण महिला किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है क्यूंकि तीन महीने होते आए है लेकिन उनके खाते मे पैसे नहीं आए और वे कर्जदार बन गई है l 


ताज़ा मामला बैतूल ब्लॉक के ग्राम बघोली और लोहारिया मे देखने को मिला जहां तीन महिला किसानों ने इस योजना के तहत अपने खेतोँ मे एक बगिया मा के नाम की लगाई है और उन्हें अभी तक राशि नहीं मिली है l


ग्राम बघोली निवासी महिला किसान ललिता पति डॉक्टर अशोक बाग़बोले ने अपने खेत मे एक बगिया माँ के नाम योजना मे फालदार जाम के पौधे लगाए है साथ ही एक एकड़ खेत मे तार फेंसिंग सीमेंट के खम्बे लगाकर की साथ ही योजना के अनुसार वाटर टेंक के साथ वर्मी कम्पोस्ड टेंक भी बनाया है l इतना काम करने मे उन्हें डेढ़ लाख रूपये का खर्च आ गया जोकि उन्होंने समूह लोन लेकर काम किया l

महिला किसान के पति अशोक बाग़बोले ने बताया की उन्होंने कलकत्ता से सौ जाम के पेड़ बुलाए और लगाए है जनपद के अधिकारीयों ने कहा था की एक एक लाख रूपये की दो किस्त दो महीनो मे आ जाएगी लेकिन अभी तक एक रूपये भी नहीं मिले l

महिला किसान ललिता का कहना है की केंद्र और प्रदेश सरकार की यह योजना अच्छी तो है जिसे लगाने मे महिलाओ की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी उनहोंने भी बगिया लगाई है लेकिन उन्हें अभी तक कोई राशि नहीं मिली और उनपर कर्ज हो गया है l 


लोहारिया की दो महिला किसानों को भी नहीं मिली अब तक राशि 


लोहारिया निवासी महिला किसान जयमाला पति बाबूराव धोटे ने बताया की उन्होंने भी इस योजना के तहत अपने खेत मे जाम का बगीचा लगाया है जिसका पैसा नहीं मिलने से वे अपने खेत मे तार फेंसिंग नहीं कर पाई है l


वंही रामकिशोर चौरे की पत्नी राधिका चौरे ने करीब डेढ़ एकड़ मे जाम बगीचा लगाया है इस योजना के तहत एक एकड़ और आधा एकड़ स्वयं के खर्चे से बगीचा लगाया l महिला किसान के पति रामकिशोर चौरे का कहना है की उन्होंने योजनाअनुरूप काम किया खेत मेतार फेंसिंग की है पौधों को सिंचाई के लिए ड्रिप भी लगाई है ढाई लाख रूपये खर्च हो गए लेकिन अभी तक उन्हें शासन से राशि प्राप्त नहीं हुई है उन्होंने मक्का बेचकर बगीचा बना लिया लेकिन अब अगली फसल मे लागत लगाने के पैसे नहीं है l


एक बगिया माँ के नाम योजना मे ब्लॉक के सौ महिला किसानों को चिन्हित कर लाभ दिया गया बगिया लगवा दी गई है लेकिन अधिकारीयों की लापरवाही या लेट लतिफी का खामियाजा ये ग्रामीण महिला किसानों को भुगतना पड रहा है l योजना के अनुसार किसानों के खाते मे बगिया लगाने के बाद दो महीनो मे दो लाख रूपये और उसके बाद के  एक  साल मे 40 हजार फिर 44 हजार रूपये की राशि दी जानी है ताकि बगीचे लगे पेड़ों का रख रखाव हो सके l


इस मामले मे जिला पंचायत सी ई ओ अक्षत जैन ने बताया की जिन लाभर्थियों ने काम पूरा कर लिया है उन्हें पैसा जरूर मिलेगा नरेगा के माध्यम से भुगतान होगा थोड़ा विलम्ब हुआ है भुगतान राशि स्टेट से आती समय समय पर किस्त डाली जाती है अभी नरेगा से भुगतान होने वाला पोर्टल बदला है इसलिए विलम्ब हो रहा स्टेट से राशि एवंटित होते ही   जल्द से जल्द महिला हितग्राहियों के अकाउंट मे पेमेंट डाली जाएगी l