बैतूल में 9.84 करोड़ की सबसे बड़ी साइबर लूट का पर्दाफाश, मृत व्यक्ति का बैंक खाता भी बना गिरोह का औजार, तीन आरोपी गिरफ्तार 


बैतूल l बैतूल जैसे शांत शहर से आज एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिले की पुलिस और साइबर सेल ने मिलकर करीब 9 करोड़ 84 लाख रुपये की एक संगठित साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया है। यह खुलासा SP वीरेंद्र जैन और ASP कमला जोशी के सीधे निर्देशन में की गई हाई-टेक जांच का नतीजा है। साइबर टीम का विशेष योगदान।

 

बैतूल में एक मजदूरी करने वाले व्यक्ति बिसराम इवने, उम्र 40 वर्ष, निवासी खे‍ड़ी सावलीगढ़ (थाना कोतवाली क्षेत्र) ने कलेक्टर और SP कार्यालय बैतूल में एक लिखित जांच आवेदन दिया था 

आवेदक ने बताया कि उसके जन-धन खाते में लगभग 2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे रहे हैं, जिनकी उसे कोई जानकारी नहीं थी।

जब वह बैंक में KYC कराने गया, तभी उसे इन भारी-भरकम ट्रांज़ैक्शनों का पता चला।


मामले  की गंभीरता देखते हुए SP के निर्देशानुसार साइबर सेल बैतूल ने तत्काल जांच प्रारंभ की।


प्रारंभिक जाँच में पता चला कि जून 2025 से अब तक उसके खाते से लगभग 1.5 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांज़ैक्शन किया गया था।


7 खातों से करोड़ों के लेन देन — खाता धारक भी इससे अंजान


जांच में सामने आया कि एक ही बैंक के 7 अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खातों को निशाना बनाते हुए गिरोह ने ₹98,495,212 रुपये की हेराफेरी की। खाता धारकों में बिस्राम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नितेश उइके, राजेश बर्डे, अमोल और चंदन के नाम शामिल हैं।


 मरने के बाद भी खाते का इस्तेमाल— मोबाइल नंबर बदला, ATM कार्ड बनवाया, और करोड़ों उड़ाए!


मुख्य गिरोह ने अपने कार्य को अंजाम देने के लिए मृत व्यक्ति राजेश बर्डे के खाते का भी किया इस्तेमाल।

चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक राजेश बार्डे के खाते का उतनी ही सक्रियता से उपयोग किया जा रहा था, जैसे कोई जिंदा ग्राहक करता है।

मोबाइल नंबर बदला,ATM कार्ड जारी कराया,इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग का लिया एक्सेस,OTP पर कब्जा जमाया

और फिर मृत व्यक्ति के खाते से लगातार ऊँची रकम के लेन-देन किए। यह खुलासा पूरे केस का सबसे भयावह पहलू बनकर उभरा है।


 बैंक में कार्यरत निजी व्यक्ति की मिलीभगत — अंदरूनी जानकारी लीक


पुलिस जाँच में पाया गया कि बैंक में पासबुक एंट्री करने वाला एक टेंपररी कर्मचारी ही इस गिरोह का मुख्य सहयोगी था।

जिसकी सहायता से गिरोह के हाथ बैंक शाखा की गोपनीय ग्राहक जानकारी तक पहुँच चुके थे, जिसके जरिए पूरी वित्तीय फर्जीवाड़े की मशीनरी चलाई गई।


ग्राहक दस्तावेजों से छेड़छाड़


खातों में फर्जी मोबाइल नंबर लिंक कराना


ATM कार्ड जारी कराना


पासबुक/चेकबुक का अनधिकृत उपयोग

 

जैसे कार्यों के जरिए गिरोह को खातों तक अंदरूनी पहुंच उपलब्ध कराई।


मुख्य अपचारी राजा राजपूत ने बैंक में काम करते हुए कई खातों की संवेदनशील जानकारी अवैध रूप से हासिल की।

इसके तार जिले से बाहर बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े पाए गए।


 ‘किट ट्रांसफर’ का नेटवर्क — खाते की पूरी किट इंदौर भेजी जाती थी

गिरोह प्रत्येक लक्षित खाते की एक किट तैयार करता था, जिसमें—


लिंक की गई सिम


ATM कार्ड


पासबुक


चेकबुक


शामिल रहती थी।

यह किट बस के माध्यम से इंदौर भेजी जाती थी, जहाँ से बाहरी फ्रॉडिस्टर बड़े ट्रांज़ैक्शन को अंजाम देते थे।


 पुलिस की कार्रवाई — इंदौर में स्थित 2 ठिकानों पर छापे, तीन गिरफ्तार

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बैतूल पुलिस ने इंदौर में आरोपियों के दो ठिकानों पर दबिश दी और बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की—


15 मोबाइल फोन (25 सिम सहित)


21 ATM कार्ड


₹28,000 नकद (काले बैग में)


11 बैंक पासबुक


7 चेकबुक


2 POS मशीन


69 ATM जमा रसीदें (21 लाख जमा)


₹48,000 की जमा पर्ची


2 लैपटॉप


1 Extreme Fiber राउटर


4 रजिस्टर व डायरी (रिकॉर्ड)

 

गिरफ्तार अपचारी—


1- राजा उर्फ आयुष चौहान, 28 वर्ष, निवासी खेड़ी (सावलीगढ़)

2- अंकित राजपूत, 32 वर्ष, निवासी इंदौर

3- नरेंद्र सिंह राजपूत, 24 वर्ष, निवासी इंदौर