रेलवे परियोजना के नाम पर इंदौर के हरित क्षेत्र को खतरा, अगले 3 साल में 2.5 लाख पेड़ों की कटाई तय
इंदौर: शहर में विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई की तैयारी चल रही है, जिस पर आज भोपाल में वन और रेलवे अधिकारियों की बैठक में फैसला होने वाला है। इस बैठक में इंदौर-खंडवा रेल लाइन के गेज कन्वर्जन के लिए अगले तीन सालों में 2.5 लाख पेड़ काटने की योजना पर चर्चा होगी, जिसका असर महू, चोरल और बल जैसे वन्यजीव-समृद्ध क्षेत्रों पर पड़ेगा।
4 लाख से अधिक पेड़ काटे जा चुके
इससे पहले भी, आईआईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से इंदौर के आसपास लगभग 4 लाख से अधिक पेड़ विभिन्न विकास कार्यों के लिए काटे जा चुके हैं। इन पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए इंदौर के बजाय शाजापुर और गुना जैसे अन्य जिलों में पौधे लगाए जाएंगे, क्योंकि इंदौर में जमीन उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस गेज कन्वर्जन से इंदौर को दक्षिण की ओर जाने के नए रास्ते खुलने और नई ट्रेनें मिलने का लाभ भी मिलेगा।
बैठक में होगा फैसला
आज शुक्रवार को भोपाल में वन और रेलवे अफसरों की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में वन भूमि को ट्रांसफर करने, पेड़ों की कटाई और मुआवजे सहित कई मुद्दों पर बात होगी। कुल मिलाकर, विकास एजेंसियों ने अगले तीन सालों में शहर और आसपास से 2.5 लाख पेड़ काटने की तैयारी कर ली है।
पेड़ों को चुकानी पड़ रही विकास की कीमत
इंदौर-खंडवा रेलवे लाइन के गेज कन्वर्जन में महू, चोरल और बल के जंगल प्रभावित होंगे। इन तीनों रेंज में दो दर्जन से ज्यादा तेंदुए, बाघ और अन्य वन्य जीव निवास करते हैं। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर विकास की कीमत पेड़ों से वसूल रहा है। आईआईटी की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2000 के बाद से इंदौर के आसपास करीब 4 से ज्यादा पेड़ विकास कार्यों की बलि चढ़ चुके हैं।
300 साल पुराना पीपल का पेड़ भी काटा
बीते दिनों लालबाग के पास 300 साल पुराने पीपल की कटाई का मामला सामने आया था। इसके बाद पेड़ों की कटाई का हिसाब-किताब करने पर पता चला कि हाईवे, सुपर कॉरिडोर, बीआरटीएस और रेलवे प्रोजेक्ट्स ने शहर की हरियाली निगल ली है। विभिन्न परियोजनाओं के लिए काटे गए पेड़ों की संख्या इस प्रकार है- इंदौर-खंडवा हाईवे के लिए 1.25 लाख पेड़ काटे गए। इंदौर-मानपुर घाट के लिए 50 हजार पेड़ काटे गए। नर्मदा-शिप्रा, आईआई और ट्रांसमिशन लाइन में 2 लाख पेड़ काटे गए। इंदौर-बैतूल हाई-वे के लिए 9000 पेड़ काटे गए। इंदौर बीआरटीएस के निर्माण में 3000 पेड़ काटे गए।
इंदौर को साफ हवा देने का काम करते हैं ये जंगल
चोरल के जंगल इंदौर को साफ हवा देने का काम करते हैं। यहां पहले भी जंगल रोड, ब्रिज, पानी और बिजली की लाइन के नाम पर पेड़ों की कटाई हो चुकी है। अब दो लाख पेड़ काटने का प्रपोजल वन विभाग ने राज्य सरकार को भेज दिया है। मंजूरी के बाद यह केंद्र के पास जाएगा। क्षतिपूर्ति के संबंध में यह बताया गया है कि इंदौर में जमीन नहीं है। जंगलों की जमीन लेने के बदले पौधे लगाने के लिए इंदौर के बजाय शाजापुर, गुना जैसे जिलों में जमीन मिल रही है। इसका अर्थ है कि 'जंगल इंदौर जिले का कटेगा और क्षतिपूर्ति अन्य जिलों में की जाएगी।'


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