स्वयंवर में श्रीराम के रूप में सीता जी को मिला मनचाहा वर:— भैंसदेही रामलीला मंचन के तीसरे दिन जनक दरबार में परशुराम मुनि का आगमन होता है। जहां वह शिव धनुष टूटा देखकर क्रोधित हो जाते है और सभी को भला बुरा कहते है। इसी दौरान लक्ष्मण से भी तीखी नोंकझोंक होती है।
          —:  परशुराम का क्रोध श्रीराम ने किया शांत :—
           लक्ष्मण के साथ तीखी नोंकझोंक देखकर श्रीराम ने बड़ी विनम्रता से परशुराम के क्रोध को धनुष पर बाण चढ़ाकर शांत किया। जिससे परशुराम को यकीन हो गया कि भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में इस पृथ्वी पर  अवतार लिया है। मुनि परशुराम भगवान श्रीराम को नमस्कार कर वहां से चले जाते है। 
          —: श्रीराम को सीता जी ने पहनाई वरमाला :—
     राजा जनक अयोध्या राजा दशरथ को बारात लेकर आने का निमंत्रण भेजते है राजा दशरथ बारातियों सहित जनकपुर पहुंचते है। जहां जनक अपनी बाकी तीन पुत्रियों के विवाह का प्रस्ताव राजा दशरथ के पास रखते हैं जिसे स्वीकार कर चारों भाइयों राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न की शादी सम्पन्न होती है। इसके बाद राजा जनक अपनी बेटियों को बड़े दुखी व उदास मन से विदा करते है। यह दृश्य देख जनता की आंखों में आंसू आ गए।
            —: राजतिलक की घोषणा   पर मंथरा ने चली कुटिल चाल:— 
      अयोध्या आकर राजा दशरथ राम के राजतिलक की घोषणा करते है यह सुनकर मंथरा रानी कैकई के कान भरती है। और राजा से दो वरदान मांगने का कहती है राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राजतिलक यह सुन रानी कैकेई कोप भवन में चली जाती है। जहां राजा दशरथ उनसे मिलने आते है रानी कैकेई नाराज होकर अपने दो वरदान मांगती है। राम को चौदह वर्ष वनवास एवं भरत को राजतिलक यह सुनकर राजा दशरथ राम राम कर बदहवास होकर गिर जाते है। तब कैकेई सुमंत्र के द्वारा राम को बुलाती है राम मिलने आते है और पिताजी का सारा हाल जानकर पिताजी की आज्ञा मानकर वन जाने के लिए तैयार हो जाते है।और वह वन जाने के लिए माता कौशल्या के पास विदा लेने जाते है। परशुराम का जोरदार अभिनय सुरेश तिवारी,दशरथ का अभिनय सुनील गुरव, कैकेई का अभिनय वामन महाले,द्वारा किया जा रहा है।