जो स्वयं दुख उठाकर दुसरो को सुख दे वही शिव है पं. श्याम मनावत ज़ी मानस मर्मज्ञ
जो स्वयं दुख उठाकर दुसरो को सुख दे वही शिव है पं. श्याम मनावत ज़ी मानस मर्मज्ञ :-भैंसदेही कौड़ीढ़ाना मे प्रदीप महाले के यहां भागवत का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत शनिवार को भव्य कलश यात्रा निकली गई जो भैंसदेही के मुख्य मार्गो एवं मंदिर से होते हुए भागवत स्थल पर पहुंची। जहाँ विधिवत पूजन कर पं. श्याम मनावत जी ने भागवत कथा प्रारम्भ की और कहा की जो सहज है भगवान उसके पास है। आपने जितने बेरीकेट्स लगा रखे है भगवान आपसे उतने ही दूर है आप जितने सरल है तरल है भगवान उतने आप के पास है।आप पत्थर मे भगवान देख लेते हो पर इंसान मे क्यों नहीं कल्याण के लिये पुत्र आवश्यक नहीं है। क्योंकि जिन्होने आत्म कल्याण कर लिया है उनके लिये पुत्र आवश्यक नहीं धरती पर शांति है स्वर्ग मे ज्यादा अशांति है। बिना पंचम पुरुषार्थ के जीवन मे शांति नहीं मिलती धर्म से पुण्य तो बहुत मिलता है पर शांति नहीं।भगवान के चरणों मे प्रेम मिल जाए तो जीवन मे शांति मिल जाती है। भागवत केवल भगवान के भक्तो का चरित्र है भगवान जैसा रखना चाहे वैसा रहना ही भागवत है। जो भगवान की इच्छा मे अपनी इच्छा मिला दे वो भागवत है। जिन्हे आवश्यकता है वो मांगे तो ठीक है पर जिन्हे आवश्यकता नहीं है फिर भी मांगे तो उन्हे मांगना नहीं चाहिए।जो घर के झगडे मे दूसरे को शामिल करते है उनका अंजाम बुरा ही होता है। ये मनुष्य है चमत्कार को नमस्कार करता है इंसान मुसीबत मे हो तो भगवान की सब बात मानता है और जैसे ही काम निकल जाता है तो फिर भगवान की कुछ नहीं सुनता। सब जगह रक्षा करने वाला भगवान है आंतोतगत भगवान ही रक्षा करता है। जीव नारायण का सगा भाई है भक्त भगवान से बड़ा होता है।माँ का गर्भ ग्रह और मंदिर का गर्भ ग्रह एक ही होता है। माँ का गर्भ उतना ही पवित्र है जितना की मंदिर का गर्भ ग्रह होता है। जननी जन्म दे तो संत को या सुर वीर को काल को कोई नहीं जीत सकता लेकिन महाराज परीक्षित ने कलयुग काल को जीता था। हमेशा पूजा पाठ मे नये कपड़े पहनना चाहिए क्योंकि आपके पहने पुराने कपड़ो मे आपके अच्छे और बुरे गुण आ जाते है। इसलिए पूजा मे हमेशा नये कपड़ो का ही उपयोग करना चाहिए मृत्यु को जो मोक्ष मे बदल दे वह साधु होता है। मन की जितनी तकलीफ है वह भगवान शंकर दूर करते है इसलिए मन की बात समझने के कारण ही उन्हें महादेव कहा जाता है। भगवान शंकर ही मनुष्य के सबसे निकट है भगवान शंकर इस धरती पर ही है यहां का देवता ही शंकर है क्योंकि भगवान शंकर कशी,कैलाश पर्वत, श्मशान,पर ही निवास करते है।और ये तीनो ही धरती पर है इसलिए भगवान शंकर ही मनुष्य के सबसे नजदीक है। शिव पापी और पुण्यात्मा दोनों को ही तारते है उनके पास कोई भेदभाव नहीं है। शिव को प्राप्त मत करना खुद शिव बन जाना जो स्वयं दुख उठाकर दुसरो को सुख दे उसे शिव कहते है। जिसके जीवन मे शिकायत नहीं है वही शिव है मूल तत्व जल है जो शिव के पास है यही शिव तत्व है। भगवान शंकर विश्वास है और पार्वती श्रद्धा है। इसके बाद शिव पार्वती का सुंदर विवाह हुआ जिसमे नाना रूप के लोग शिव जी की बारात मे शामिल हुए। और विवाह बड़े ही धूमधाम से हुआ। पं. जी भागवत कथा को बड़े ही सुंदर और मार्मिक से प्रस्तुत कर रहे है जिसे जनता बड़े भाव से सुन रही है।


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