देश की ढाल बनी 'आकाश' मिसाइल, डॉ. रामाराव ने साझा की सफलता की कहानी
पाकिस्तान की तरफ से किए गए हवाई हमलों को नाकाम करने में स्वदेशी आकाश मिसाइल डिफेन्स सिस्टम ने एक अहम भूमिका निभाई है. पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को आकाश ने पल भर में ढेर कर दिया. इस बात की ख़बर आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम को बनाने वाले डॉ प्रहलाद रामाराव को हुई तो उनकी आंखों के खुशी के आंसू बहने लगे. आकाश प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुके पद्मश्री डॉ रामाराव के लिए ये एक भावनात्मक पल था कि उनकी टीम द्वारा बनाया गया ये एयर डिफेन्स सिस्टम देश के काम आ रहा है. उनको खुशी थी कि उनका बनाया गया सिस्टम दुश्मन को नाकों चने चबवा रहा था.
डॉ रामाराव ने आकाश मिसाइल प्रोजेक्ट के बारे में कहा कि 1983 में मुझे इस प्रोग्राम का प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया गया. य़े एक मुश्किल प्रोजैक्ट था. जब हम ये मिसाइल तैयार कर रहे थे , तो हमने सोचा कि इसमें 4 चीजों का होना बहुत ज़रूरी है, गति , चुस्ती, मारक क्षमता और इंटेलिजेंस. इसलिए इसमें बहुत ध्यान की ज़रुरत पड़ी. शुरुआत में बहुत नाकामियां भी मिली लेकिन डॉ अब्दुल कलाम ने बहुत प्रोत्साहित किया. वो कहा करते थे के चिन्ता मत करो, तुम कर लोगे, हमें विश्वास था के हम एक दिन ज़रूर कामयाब होंगे.
रामाराव ने कहा कि 15 सालों की जद्दोजहद के बाद हमने एक ऐसा प्रोडक्ट तैयार किया जिसने आज खुद को साबित कर दिया. मैं खुश हूं कि ये एक बड़ी कामयाबी थी और ये बात साबित हुई. ये पहली बार था कि आकाश को युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया.
ये कैसे काम करती है?
डॉ रामाराव ने बताया कि ये एक Multi target handling- medium range air defence system है. आकाश एक मीडियम रेंज मिसाइल है जो 40 किलोमीटर तक कई टारगेट्स को एक साथ निशाना बना सकती है. इसे बड़े एयरक्राफ्ट और बड़े ड्रोन के लिए बनाया गया है. मुझे विश्वास है कि चाहे जितने भी निशाने हो, कितने भी ड्रोन या जहाज हो, हमारे एयर डिफेंस सिस्टम सबको ध्वस्त कर सकते हैं. हम लोगों ने एक तिहाई कीमत में शानदार मिसाइल बनाई है.
हैदराबाद में प्रोडक्शन, बैंगलोर में बन रहा रडार
डॉ रामाराव ने बताया कि आज हमारे पास 200 इंडस्ट्रीज़ ऐसी हैं जो केवल आकाश मिसाइल के कॉम्पोनेंट और सिस्टम का काम कर रही हैं. हैदराबाद सेंटर में आकाश मिसाइल का प्रदर्शन हो रहा है और बैंगलोर में रडार बन रहा है. आकाश मिसाइल की क्षमता की वजह से हम इसे दो देशों को पहले ही एक्सपोर्ट कर चुके हैं. अब हो सकता है और देश भी खरीदना चाहेंगे.
सही दिशा और नेतृत्व जरूरत
आकाश एक उदाहरण है कि आपकी स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री की क्षमता किसी से कम नहीं है. हमें किसी भी कंपोनेंट के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है. सब कुछ आपके अपने देश में ही है. हम किसी पर भी निर्भर नहीं हैं. हम अपने लोगों के लिए रोजगार भी पैदा कर रहे है. भारत पाकिस्तान के इस CONFLICT में आकाश मिसाइल की सफलता ये बताती है कि भारतीय लोग कुछ भी कर सकते हैं. जरुरत सिर्फ सही दिशा और नेतृत्व की है.


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