पुतिन से मिले ट्रंप के विशेष दूत, यूक्रेन युद्ध पर तेज़ होगी शांति वार्ता
मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगभग 10 दिनों बाद एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए. उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात की. यह मीटिंग यूक्रेन में चल रहे युद्ध को रोकने की कोशिशों का हिस्सा है. चार घंटे से ज्यादा तक दोनों के बीच मीटिंग चलती रही. इस बातचीत को रूस ने ‘यूक्रेन समझौते के पहलुओं’ पर केंद्रित बताया. लेकिन क्या यह मुलाकात शांति की दिशा में कोई बड़ा कदम उठा पाएगी, या फिर बातें सिर्फ खबरों तक सीमित रहेंगी?
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में रूस को शांति के लिए तैयार होने को कहा.
डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर शांति वार्ता में तेजी लाने का दबाव बनाया है. शुक्रवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘रूस को जल्दी करना होगा. इस बेकार और भयानक युद्ध में हर हफ्ते हजारों लोग मर रहे हैं.’ ट्रंप का कहना है कि यह युद्ध कभी नहीं होना चाहिए था. वह विटकॉफ के जरिए पुतिन तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि बातचीत में देरी बर्दाश्त नहीं होगी. ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर रूस टस से मस नहीं हुआ, तो वह रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं.
रूस को मीटिंग से ज्यादा उम्मीद नहीं
यह विटकॉफ और पुतिन की इस साल तीसरी मुलाकात थी. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इस मीटिंग में पुतिन और ट्रंप की आमने-सामने मुलाकात की संभावना पर चर्चा हो सकती है. दोनों नेता फोन पर बात कर चुके हैं, लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अभी तक उनकी आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई. दिमित्री पेसकोव ने इसे ‘बड़ा’ न बताते हुए कहा कि इस बैठक से कोई चमत्कार की उम्मीद नहीं है. फिर भी, रूस के निवेश दूत किरिल दमित्रियेव ने बातचीत को ‘उपयोगी’ करार दिया. उन्होंने कहा कि यह मीटिंग रूस के लिए अपनी चिंताओं को व्यक्त करने का एक मौका होगी. दोनों पक्षों ने ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने के पिछले समझौते का जिक्र किया है. हालांकि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहे हैं.
पुतिन सच में चाहते हैं शांति?
राष्ट्रपति पुतिन हमेशा शांति की बात करते रहे हैं, लेकिन वह साफ कहते हैं कि इसके लिए कुछ बुनियादी मुद्दों का हल जरूरी है. रूस के मुताबिक, पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल न हो, उसकी सेना का आकार सीमित हो, और रूस के दावे वाले चार यूक्रेनी क्षेत्रों से यूक्रेन पीछे हट जाए. रूस का मानना है कि वह जंग में मजबूत स्थिति में है, क्योंकि वह यूक्रेन के करीब 20 फीसदी हिस्से पर कब्जा किए हुए है और उसकी सेना आगे बढ़ रही है. पुतिन का यह रुख दर्शाता है कि वह स्थायी शांति चाहते हैं, न कि कोई अस्थायी समझौता.
शांति की राह में अड़चन क्या है?
शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा अविश्वास है. यूक्रेन का कहना है कि रूस की शर्तें मानने का मतलब होगा सरेंडर करना. यूक्रेन ने अमेरिका को उन ठिकानों की लिस्ट भेजी है, जहां रूस ने हाल में हमले किए, जो ऊर्जा समझौते का उल्लंघन है. दूसरी तरफ, रूस का मानना है कि यूक्रेन को कुछ इलाकों को छोड़ना होगा, क्योंकि जंग में वह कमजोर स्थिति में है. यह टकराव शांति की राह को मुश्किल बना रहा है.
ईरान से भी बात करेंगे विटकॉफ
विटकॉफ की यह यात्रा सिर्फ रूस तक सीमित नहीं थी. वह शनिवार को ओमान में ईरान के साथ उसकी परमाणु नीति पर मीटिंग करने वाले हैं. ट्रंप ने समझौते को तैयार नहीं होने पर ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है.


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