बैतूल आयल मिल के फिल्टर टैंक में दो कर्मचारियों के शव मिलने के बाद गुस्साए परिजनों ने किया चक्काजाम

 

बैतूल मप्र l   बैतूल आयल मिल में दो कर्मचारियों की संदिग्ध मौत के बाद पूरा दिन हंगामाखेज रहा  । दोनो कर्मचारी फिल्टर चेम्बर में क्यो और कैसे गए ये अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है वहीं मृतकों के परिजनों और मिल कर्मियों ने भी मुआवजे और जांच की मांग को लेकर दो बार चक्काजाम किया । 

 बैतूल जिले की सबसे पुरानी और एकमात्र सोया आयल मिल बैतूल ऑयल्स में शनिवार की रात दो कर्मचारी अचानक लापता हो गए । काफी देर तक ढूंढने के बाद  कैलाश पानकर और दयाराम नरवरे नाम के दोनो कर्मचारियों के शव मिल के फिल्टर टैंक में बरामद हुए जिससे हड़कम्प मच गया । शवों को एसडीआरएफ ने बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए तो भेज दिया लेकिन मृतकों के परिजनों और मिल कर्मचारियों ने 15 -15 लाख के मुआवजे और जांच की मांग को लेकर अस्पताल परिसर के बाहर सड़क पर चक्काजाम कर दिया । मिल प्रबंधन 10 लाख तक मुआवजा देने पर राजी था  ।

इस मामले में बैतूल एस डीएम राजीव कहार ने बताया कि  दोनो पक्षों के बीच पूरे तनावपूर्ण हालात बने रहे । आखिरकार प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मृतकों के परिजन 10 - 10 लाख के मुआवजे पर सहमत हुए । दोनो पक्षों ने अधिकारियों के सामने एक एग्रीमेंट पर दस्तखत किए जिसके बाद आखिरकार दोनो शवों का पोस्टमार्टम 18 घण्टे बाद हो सका ।

 

. पूरा घटनाक्रम सन्देह के घेरे में तब आया जब मालूम हुआ कि मरने वाले दोनो कर्मचारी मिल के बॉयलर पर काम करते थे लेकिन घटना की रात उनके शव फिल्टर प्लांट में पाए गए । बिना सुरक्षा उपायों के दोनो कर्मचारी आखिर  फिल्टर प्लांट में क्यों गए थे और किस वजह से उनकी मौत हुई इसे लेकर मिल प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं है । 

बैतूल एस डी ओपी शालिनी परस्ते ने बताया कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई है दोनो शवों का पीएम कराया जा चुका है l

 बैतूल के उद्योगपति निलय विनोद डागा घटना के समय बैतूल में मौजूद नहीं थे लेकिन पुलिस प्रशासन लगातार उनके सम्पर्क में है । मिल प्रबंधन द्वारा मृतकों के बच्चों की शिक्षा और भरणपोषण की जिम्मेदारी लेने का भी वादा किया जा रहा है ।