जिला अस्पताल में जच्चा बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने गलत दवाइयां देने का लगाया आरोप,बच्चे का शव झोले में लेकर घूमते रहे परिजन

जिला अस्पताल में जच्चा बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने गलत दवाइयां देने का लगाया आरोप
बैतूल का जिला अस्पताल प्रसूताओं के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है।। ताज़ा मामले में प्रसूति के दौरान मृत शिशु का जन्म हुआ लेकिन इसके ठीक 24 घण्टे बाद प्रसूता की भी मौत हो गई । मृतिका के परिजनों ने जिला अस्पताल के स्टाफ पर प्रसूता से मारपीट करने और उसका गलत इलाज करने का आरोप लगाया है साथ ही परिजन मृत बच्चे के शव को थैले में लेकर 24 घण्टे से भूखे प्यासे मदद के लिए घूम रहे थे । हंगामा होने के बाद प्रशासन ने एक जांच दल गठित कर दिया है । 48 घण्टे पहले भी प्रसूति के बाद एक महिला की मौत हो गई थी जिसकी जांच रिपोर्ट आना बाकी है ।
बैतूल के घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रविवार की रात एक प्रसूता सुमित्रा बाई को प्रसव के लिए जिला अस्पताल रैफर किया गया था । मृतिका सुमित्रा की मां सुशीला बाई के मुताबिक जिला अस्पताल ने नर्सिंग स्टाफ ने सुमित्रा के हाथ बांधकर उसके साथ मारपीट और गालीगलौज की । प्रसव के बाद बच्चा मृत पैदा हुआ जिसका शव एक थैले में रखकर परिजनों को सौंप दिया गया। इसके ठीक अगले दिन यानि सोमवार की शाम सुमित्रा बाई को नर्सिंग स्टाफ ने कुछ दवाइयां दी जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ देर तड़पने के बाद उसकी भी मौत हो गई।
सुमित्रा के पति अर्जुन का कहना है की पत्नी से पहले बच्चा मृत अवस्था मे जन्मा था जिसके शव को नर्सिंग स्टाफ ने एक थैले में रखकर परिजनों को सौंप दिया । शहर में बच्चे का अंतिम संस्कार कहां और कैसे करें इसी सोच में पड़े परिजन दो दिन से बच्चे का शव लेकर घूम रहे हैं ।
इस घटना से ठीक 48 घण्टे पहले भी जिला अस्पताल में एक प्रसूता की मौत के बाद उसके परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ पर ग़लत इलाज करने और लापरवाही का आरोप लगाया था l प्रशासन ने जांच शुरू की है और अब ये लगातार दूसरा मामला है जब एक प्रसूता की मौत को लेकर हंगामा हो रहा है । इस बार भी एक जांच दल गठित किया गया है ।
इस मामले में डिप्टी कलेक्टर मकसूद खान ने बताया की सोमवार को सुमित्रा बाई को डिलेवरी के लिए भर्ती किया गया था जंहा सुमित्रा ने मृत बच्चे को जन्म दिया उसके बाद प्रसूता की भी मौत हो गई परिजनों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल में लापरवाही को लेकर ज्ञापन दिया है जिस पर जांच कराई जाएगी और मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ पता चल पाएगा l
ऐसे मामलों में जांच दल तो गठित किये जाते हैं लेकिन जांच रिपोर्ट का खुलासा कभी नहीं किया जाता । वहीं जिला अस्पताल में सारी आधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद प्रसूताओं की मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं जो एक चिंता का विषय है । स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को लेकर कितना गम्भीर है ये तो कहना मुश्किल है लेकिन जिला अस्पताल में लापरवाही हद दर्जे तक होती है ये तो सामने दिख रहा है ।